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Sunday, 28 November 2010

मै चलता रहूँगा .







अब न रुकुंगा ,
न डहर भूलूंगा ,
दिल में दहक ले ,
मैं चलता रहूँगा।

मंजिल नजदीक नहीं,
न मंजिल से दूर हूँ,
वक़्त का आभाव है ,
मै चलता रहूँगा।
--------------------------------------
अजनबी वो थे ,
अब हम बन कर फिरते हैं ।
लाखों है पीठ पर लदे ,
आशाओं के मोमबत्ती हाथ लिए ,
निराश नहीं करूँगा।
मै चलता रहूँगा
---------------------------------------
खग नहीं खगेश हूँ,
व्योम के साम्राज का...
अजेय अवधेश हूँ ,
मानवता में अहिंसा का
बदलता परिवेश हूँ
परिवेश को परिवेश से ,
बदलता रहूँगा


अब रुकुंगा ,
डहर भूलूंगा ,
दिल में दहक ले ,
मैं चलता रहूँगा



~यज्ञ दत्त मिश्र
११/२८/२०१० ५:५४ सायं काल ।

15 comments:

Anonymous said...

nice

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत और संदेशात्मक रचना ...

कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

.............

Santak Dalai said...

very nice josh bhar diya yaar

Yagya said...

@Sangita mam..

maine word verification hata diya..

thank you.

Pratibha Mishra said...

nice imagination each n every time
har baar kuchh naya..
amazing

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी इस रचना का लिंक मंगलवार 30 -11-2010
को दिया गया है .
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

Yagya said...

संगीता स्वरुप जी

जान कर बहुत ख़ुशी ही । मैं चर्चा मंच के समर्थक हूँ । प्रतिदिन वहाँ लिंक पढ़ता हूँ।
आपके आशीर्वाद के उत्सुकता से ,
यज्ञ
धन्यवाद

निर्मला कपिला said...

परिवेश को परिवेश से मै बदलता चलूँगा---- बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है। सकारात्मक सोच। शुभकामनायें।

POOJA... said...

वाह... क्या लिखा है... बहुत खूब...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर और प्रभावी रचना..... मनोभावों की बेहतरीन अभिव्यक्ति....

केवल राम said...

मानवता में अहिंसा का
बदलता परिवेश हूँ ।
परिवेश को परिवेश से ,
बदलता रहूँगा ।
काश ऐसा प्रयास सभी कर पाते...सुंदर कविता
चलते -चलते पर आपका स्वागत है

vineet said...

khatarnaak likha hai bhai mere, by the way hindi rox, ghabra mat, jab tak blog ka contnt jab tak catchy rahega language wil nt b a barrier,osum post baby, phoda

अनुपमा पाठक said...

अग्रसर होने को प्रेरित करती रचना!

Majaal said...

चलते रहिये साहब, और लेखनी को और भी बेहतर करते रहिये ....

sunil arya said...

excellent work....